WELCOME TO MY VILLAGE

History


ये  गावं बहुत साल पहले 06-10-1911 को बसाया गया था. पहले यहाँ पे बहुत घना जंगल था. अकाल पड़ा हुआ था. ये जमीन बरवाला के अंदर आती थी. ये एक मुसलमान की जमीन थी जिसका नाम "खान बहादुर" था. मेरे पूर्वज गावं "धान्शु" से यहाँ पर पशु चराने आते थे. तो उन्होंने इस जमीन पे खेती करने की सोची तो खान बहादुर ने कहा ये जंगले काट लो और जितनी जमीन पे चाहो खेती कर लो.


Dhani Khan Bahadur
तब मेरे पूर्वजो ने जगल काट कर खेती करनी शुरू कर दी। भगवान की दया से उस बार बारिश भी अछी हुई तो वहाँ पर फसल भी बहुत अछी हुई। तब मेरे पूर्वज अपने परिवारों क साथ यहीं पे बसेरा कर लिया। फिर इसे ढानी का नाम दे दिया गया। वे लोग वहाँ पे माता की पूजा करते थे तो उन्होने यहाँ भी पूजा शुरू कर दी। बाद मे यहाँ एक मंदिर बना दिया गया और तब से लकर आज तक उस माता की पूजा होती है इस गाँव मे। फिर बाद मे इस गाँव को “ढ़ानी खान बहादुर” का नाम दे दिया गया और इस तरह मेरे इस गाँव की नीव रखी गई।......




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