WELCOME TO MY VILLAGE

Sunday, 22 January 2012

Welcome To All Visitors....

Hello Guest.....
    This is the 1st website of my in which i described about my village.....
Here is a poem about my Village. Please read it once.


पहले कभी एक गाँव था,
उस गाँव में भी छांव था
उस छाँव से छन कर यहाँ,
जीवन का नन्हा पाँव था.

एक रौशनी थी धूप की,
बिखरे हुए एक रूप की,
विश्वास का पलना लिए,
शीतलता भरे एक कूप की.

उस गाँव से गुजरा करें थे,
आम भी और ख़ास भी,
फैले हुए से खेत थे,
पत्ते भी थे और घास भी.

अगनित कहानी थीं बिखरी,
किस तरह मेला लगा था,
हौले-हौले चल के घर से,
खुशियों का वो रेला सजा था.

फूस और खपरैल भी था,
लेपने को मिट्टिया  भी,
मोहने को कोयल की कू-कू,
झूलने को रस्सियाँ भी.

रोज़ करता था मैं श्रम और,
रोज़ सोता था मज़े से,
थक ना जाऊं ये ना होता,
ना कोई था चोंचला.

फिर ना जाने किस घडी में,
गाँव मेरा खो  गया,
बन गयी अट्टालिकाएं,
घर हमारा ना रहा.

Thanks for reading

2 comments:

  1. its the greatest knowledge for the villagers of DHANI KHAN BAHADUR

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    1. yes dear wait for some time and you will find a great resources of knowledge....

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